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Bijli Mahadev Mandir Kullu | बिजली को खुद में समाहित करने वाले बिजली महादेव की सम्पूर्ण जानकारी

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भारत का हिमांचल प्रदेश जितना हिल स्टेशनो, पहाड़ो और अपनी प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर प्रसिद्ध है उतना ही यहाँ पर बने कुछ प्राचीन मंदिरो के लिए भी। हिमांचल प्रदेश के मंदिर उत्तराखंड के मंदिरो की तरह इतना अभी विकसित तो नहीं हुए हैं शायद इस वजह से ही इन मंदिरो की प्राचीन खूबसूरती अभी भी इतनी बरकरार है। हिमाचल में ही स्थित एक चूड़धार महादेव मंदिर भी है जिसके बारे में हम अपने पिछले ब्लॉग में बात कर चुके हैं। हम आज इस ब्लॉग में जिस प्राचीन मंदिर की बात करने जा रहे हैं, वह कुल्लू में स्थित “बिजली महादेव मंदिर” है।

बिजली महादेव मंदिर

इस मंदिर को लेकर बहुत सी मान्यताये और कहानी हैं जो इस मंदिर को और भी रोचक और आस्था का केंद्र बनाती हैं। इस मंदिर के बारे में एक प्रमुख बात कही जाती है की इस मंदिर में बने शिवलिंग पर हर 12 साल बाद प्राकृतिक रूप से बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर की शिवलिंग टूट कर बिखर जाती है, जिसके बाद एक ख़ास लेप द्वारा शिवलिंग को पुनः जोड़ दिया जाता है। तो आईये जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी सभी जानकारियों को। जिससे आपको इस मंदिर तक आने में कोई भी दिक्कत न हो..

बिजली महादेव मंदिर कहाँ है?

बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू घाटी के कशावरी गांव में स्थित है, जो कुल्लू की व्यास नदी को पार करके कशावरी गांव में है। यह मंदिर कुल्लू में 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर की सबसे अच्छी बात यह है की यहाँ मंदिर तक आप ट्रेक करके मोटरसाइकिल या कैब द्वारा किसी भी तरह से आसानी से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर के लिए चंसारी गांव से पैदल ट्रेक शुरू होता है। यह ट्रेक 3 किलोमीटर का है।

बिजली महादेव की कहानी क्या है?

इस मंदिर से जुड़ी हुयी कहानी बहुत ही रोचक है और एक पौराणिक कहानी से जुड़ी हुयी है। जो भगवान शिव एक दानव और इंद्रा भगवान से सम्बंधित है। यह मंदिर कुल्लू के कशावरी गांव में है और यहाँ के ग्रामीण बताते हैं की इस मंदिर का निर्माण एक कुलंत नामक राक्षस के वध के बाद हुआ।

ऐसा माना जाता है की एक बार कुलंत नामक दानव व्यास नदी के पास रहने वाले सभी लोगो को मारना चाहता था इसलिए उसने अपने रूप को एक असगर सापं में बदल कर व्यास नदी का प्रवाह गांव की ओर जाने से रोक दिया। वह सभी ग्रामीणों को पानी की कमी से मारना चाहता था। सभी ग्रामीण भगवान शिव की आराधना करने लगे और उनसे इस संकट से निकालने के लिए प्रार्थना करने लगे। जब भगवान शिव को इस बात का पता चला तो भगवान शिव ने राक्षस का वध करने के लिए उसके साथ युद्ध करना शुरू कर दिया।

बिजली महादेव मंदिर

भगवान शिव ने उस राक्षस को अपने छल की जाल में फसाया और उससे पीछे की ओर देखने के लिए कहा। जैसे ही राक्षस पीछे की ओर मुड़ा भगवान शिव ने ठीक उसी समय राक्षस का वध कर दिया और वह राक्षस एक पर्वत में बदल गया। ऐसा माना जाता है की आज जिस पर्वत पर यह मंदिर बना हुआ है वह उस राक्षस का मृत शरीर है।

भगवान शिव राक्षस का वध करने के बाद इंद्रा भगवान के पास गए और उनसे इस पर्वत पर हर 12 साल के बाद बिजली गिराने के लिए कहा। इंद्रा ने भगवान शिव से कहा अगर मैं बिजली इस पर्वत पर गिराऊंगा तो यहाँ आस पास के सभी गांव और लोगों को बुरी तरह से नुकसान होगा। तब भगवान शिव ने कहा मैं इस पर्वत पर एक लिंग के रूप में सदा विराजमान रहूँगा और तुम्हारे द्वारा गिरायी गयी बिजली को स्वयं में अवशोषित कर लूंगा।

तब से लेकर अब तक यही माना जाता है की इस जगह हर 12 साल बाद बिजली गिरती है जो सीधा मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर गिरती है और टूट कर बिखर जाती है। जिसके बाद मंदिर के पुजारी द्वारा शिवलिंग को एक ख़ास मक्खन के लेप द्वारा जोड़ा जाता है और कुछ दिनों बाद यह पुनः ठीक हो जाती है।

बिजली महादेव क्यों प्रसिद्ध हैं?

बिजली महादेव इसलिए प्रसिद्ध हैं क्यूंकि बिजली महादेव पर हर 12 साल बाद बिजली गिरती है और यह शिवलिंग को टुकड़ो में तोड़ देती है। टुकड़ो में टूटने के बाद शिवलिंग को यहाँ के पुजारी द्वारा अनाज, दाल और मक्खन के एक खास लेप द्वारा जोड़ा जाता है। कुछ दिनों बाद शिवलिंग पुनः अपने पहले स्वरुप में आ जाती है।

बिजली महादेव मंदिर तक का ट्रेक कैसा है?

इस मंदिर की सबसे अच्छी बात यही है की यहाँ आप ट्रेक करके, मोटर साइकिल द्वारा या कैब द्वारा भी आसानी से आ सकते हैं। यदि आपको ट्रेकिंग पसंद है तो आप इस मंदिर तक ट्रेक द्वारा भी आ सकते हैं। इस मंदिर का ट्रेक 3 किलोमीटर का है जो चंसारी गांव से शुरू होता है। कुल्लू बस स्टैंड से बस आपको चंसारी गांव की मुख्य सड़क के पास छोड़ देती है उसके बाद आपको पैदल ही सड़क की किनारे से ऊपर मंदिर तक का ट्रेक शुरू करना होता है।

मंदिर तक का यह ट्रेक कुछ गांव से होकर जाता है। इस ट्रेक के शुरू के हिस्से में आपको सीढ़ियों द्वारा चढ़ाई शुरू करनी होगी। इस ट्रेक के शुरू के मार्ग से लेकर लगभग ऊपर मंदिर तक आपको सीढ़ियों द्वारा ही जाना होता है। ट्रेक का मार्ग कुछ गांव से तो कुछ जंगल से होकर जाता है। अगर आप पहली बार इस ट्रेक को कर रहे हैं तो आप रास्ते में बने निशानों को फॉलो करे जिसकी सहायता से आप मंदिर तक आराम से पहुंच जायेंगे।

मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुछ दुकाने और रहने के लिए छोटे छोटे घर बने हुए हैं। जहाँ आप एक रात रुक भी सकते हैं। ऊपर के रास्ते में आपको मंदिर से लगभग 200 से 300 मीटर की दूरी पर एक मंदिर का गेट बना हुआ है। गेट के बाद आपको होते हैं बिजली महादेव मंदिर के दर्शन जो दूर से ही दिख जाता है। यदि आप इस ट्रेक को सर्दियों के शुरुआत में करेंगे तो बर्फ पर बहुत ध्यान से चले क्यूंकि बर्फ पड़ने पर यह रास्ता एक दम से फिसलन भरा हो जाता है।

मंदिर के ट्रेक में पानी और कहाँ रुके?

ट्रेक के मार्ग में कुछ जगहों पर पानी का स्रोत भी है तो वहां से आप पानी भर सकते हैं। ट्रेक के दौरान कुछ ही जगह पर पानी का स्रोत है तो ट्रेक में अपने पास पानी की एक बोतल जरूर रखे। यदि आप बिजली महादेव मंदिर में दर्शन के पश्चात एक रात यहाँ रुकना चाहते हैं तो ऊपर मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुछ रुकने के लिए घर बने हुए हैं जो कच्चे और लकड़ी द्वारा बने हुए हैं। जहाँ आप रुक सकते हैं।

बिजली महादेव आने का सबसे अच्छा समय?

बिजली महादेव मंदिर की यात्रा को आप मार्च से नवंबर तक कर सकते हैं। सर्दियों के कुछ महीनो में इस मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन ट्रेक खुला रहता है। मंदिर आने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून तक का है। इन दिनों में यहाँ का मौसम सुहाना बना रहता है। मार्च के शुरू में आपको कुछ दिनों तक स्नोफॉल भी देखने को मिल सकती है।

मार्च के बाद मैदानी इलाको में अधिक तेज़ गर्मी पड़ती है और बच्चो की छुट्टियां भी होती हैं तो इन दिनों में यहाँ आना सबसे अच्छा माना जाता है। इस मंदिर में आप शिवरात्रि के दौरान भी आ सकते हैं जो बहुत ही अच्छा माना जाता है।

बिजली महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे?

बिजली महादेव मंदिर तक आप बस, फ्लाइट और ट्रेन द्वारा पहुंच सकते हैं। फ्लाइट और ट्रेन द्वारा आप आधा सफर ही तय कर पाएंगे और बाकि का आधा सफर आपको सड़कमार्ग द्वारा तय करना होगा। सबसे अच्छा तरीका बस द्वारा है मंदिर तक पहुंचने का। तो आईये नीचे विस्तार से मंदिर तक पहुंचने की सभी जानकारियों को जानते हैं…

बस द्वारा बिजली महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे?

बिजली महादेव मंदिर तक पहुंचने का सबसे अच्छा और किफायती तरीका बस द्वारा है। आप जिस भी शहर से आते हैं अगर वहां से कुल्लू के लिए सीधे बसे मिलती हैं तो आप वहां से सीधे कुल्लू आ सकते हैं और अगर नहीं मिलती हैं तो सबसे अच्छा तरीका है की आप पहले दिल्ली पहुंचे।

आपको दिल्ली के कश्मीरी गेट के ISBT से सीधे कुल्लू के लिए बसे मिल जाएँगी। यहाँ से आपको सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की बसे मिल जाएँगी, जहाँ सरकारी बसों का किराया 800 से 900 होता है वहीं प्राइवेट बसों का किराया 1200 से 1300 रुपये होता है। दिल्ली से कुल्लू की दूरी 464 किलोमीटर है जिसे पूरा करने में आपको 9 से 10 घंटे लगेंगे।

कुल्लू बस स्टैंड से हर एक या दो घंटे बाद आपको बिजली महादेव के ट्रेकिंग पॉइंट चंसारी गांव के लिए बस मिल जायेगी, जिसका किराया 40 से 50 रुपये होता है। कुल्लू बस स्टैंड से बिजली महादेव की दूरी 5 किलोमीटर की है जिसे आप 30 मिनट में बस द्वारा पूरा कर लेंगे। यहाँ से आपका ट्रेक शुरू होता है जो एक दो गांव से होकर जाता है।

ट्रेन द्वारा बिजली महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे?

यदि आप ट्रेन द्वारा यहाँ आना चाहते हैं तो ट्रेन के माध्यम से भी आ सकते हैं लेकिन ट्रेन से आने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है। ट्रेन द्वारा बिजली महादेव के सबसे निकट रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर रेलवे स्टेशन है तो आपको आपके शहर से यहाँ तक पहुंचना होगा। यहाँ से आपको कुल्लू बस स्टैंड के लिए कुछ प्राइवेट टैक्सी या कैब मिल जाएँगी जिसकी सहायता से आप कुल्लू बस स्टैंड पहुंच सकते हैं। उसके बाद कुल्लू बस स्टैंड से आप बिजली महादेव मंदिर के ट्रेकिंग पॉइंट तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

फ्लाइट द्वारा बिजली महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे?

यदि आप यहाँ फ्लाइट द्वारा आना चाहते हैं तो बिजली महादेव के सबसे निकट एयरपोर्ट भुंतर एयरपोर्ट हिमाचल प्रदेश है। भुंतर एयरपोर्ट से आप टैक्सी द्वारा आसानी से कुल्लू बस स्टैंड पहुंच सकते हैं। कुल्लू बस स्टैंड से बस द्वारा आप बिजली महादेव की ट्रेक पॉइंट तक आ सकते हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ से आपको नियमित तौर पर भुंतर के लिए फ्लाइट मिल जाएगी। फ्लाइट द्वारा यहाँ आना आसान होता है लेकिन थोड़ा खर्चीला भी हो सकता है।

बिजली महादेव तक बिना ट्रेक करे सीधे गाड़ी द्वारा कैसे पहुंचे?

यदि आप इस मंदिर तक ट्रेक करके नहीं जाना चाहते हैं और सीधे मंदिर तक गाड़ी द्वारा आना चाहते हैं तो यह विकल्प भी आपके पास मौजूद है। इसके लिए आपको कुल्लू से गाड़ी द्वारा जणा गांव आना होगा। कुल्लू से जणा की दूरी 35 किलोमीटर की है, जिसे पूरा करने में आपको 1 से 1.5 घंटा लगेगा। जणा गांव से आप यहाँ की लोकल गाड़ी द्वारा मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। जणा गांव से मंदिर तक की दूरी 25 किलोमीटर की है। जिसे आप अपनी गाड़ी द्वारा भी पूरा कर सकते हैं। आप यदि मंदिर तक अपनी गाड़ी द्वारा आ रहे हैं तो गूगल मैप की सहायता भी ले सकते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • इस ट्रेक के दौरान आप अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखे और ट्रेक में पड़ने वाले गांव में ही पानी भर ले गांव के अलावा सीधे ऊपर मंदिर के पास ही पानी का स्रोत है।
  • आप यहाँ हो सके तो बस द्वारा ही आये जो सबसे अच्छा रहता है। लेकिन बस आपको मुख्य सड़क पर ही उतार देती है।
  • यदि आप यहाँ कैंपिंग करना चाहते हैं तो कैंपिंग भी कर सकते हैं लेकिन कैंपिंग का सारा सामान आपको खुद लाना होगा।
  • यदि आप मार्च के समय में आ रहे हैं तो आप शूज गियर भी साथ रख ले जो आपकी बर्फ में चलने में सहायता करेगी।

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