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मलंगगढ़ किला ट्रेक, एडवेंचर से भरा हुआ। क्या है इससे जुड़ा विवाद? कैसे पहुंचे? क्या है इस ट्रेक की विषेशता? और इससे जुड़ी सभी जानकारी (Malanggarh Fort Trek, full of adventure. What is the controversy related to this? How to reach? What is the specialty of this trek? And all the information related to it )

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भारत में बहुत पहले राजा महाराजो का राज हुआ करता था। तब वह पहाड़ो को काट कर उनपर अपना किला कुछ इस प्रकार बनाया करते थे की अगर दुश्मन उनपर हमला कर दे तो किला उनकी रक्षा करने में समर्थ हो। ऐसे किले आज भी मौजूद हैं जो अपने इतिहास को, उनके सामने हुए युद्ध और पुरानी वास्तुकला का व्याख्यान आज भी कर रहे हैं। ये किले तब भी मजबूती से खड़े थे और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़े हैं बस वक़्त के साथ हल्के हल्के खंडर में तब्दील होते जा रहे हैं। आज हम ऐसे ही एक किले की बात करने जा रहे हैं, जिसे “मलंगगढ़ किले” के नाम से जाना जाता है।

मलंगगढ़ किला

इस ब्लॉग में हम इस किले से सम्बंधित सभी जानकारियों को आपसे साझा करेंगे। इस ट्रेक को कब करे? क्यों प्रशक्षित ट्रेकिंग गाइड के देख रेख में इस ट्रेक के ऊपरी भाग को करना चाहिए? क्या है इससे जुड़ा हुआ विवाद? किस प्रकार इस ट्रेक को करे? इस ट्रेक का रास्ता कैसा है? क्यों है ये ट्रेक इतना खतरनाक? आदि सभी जानकारियों को इस ब्लॉग के माध्यम से जानेगे। हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी कैसी लगी उसका फीडबैक कमेंट के माध्यम से हमसे जरूर साझा करे।

मलंगगढ़ किला कहाँ स्थित है?

मलंगगढ़ किला

मलंगगढ़ किला एक अनोखा किला है, जिसमे दुश्मनो पर आक्रमण हेतु कोई भी हथियार या अन्य मशीनीकरण उपकरण नहीं है। मलंगगढ़ किला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह किला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के माथेरान हिल रेंज में स्थित है। यहाँ तक आप कल्याण से ऑटो पकड़कर आसानी से पहुंच सकते हैं।

मलंगगढ़ किला का इतिहास क्या है?

मलंगगढ़ किला के बारे में बताया जाता है की इसका निर्माण सातवीं शताब्दी के मौर्य वंश के शासक राजा नलदेव ने कराया था। ऐसा कहा जाता है की यहाँ मछिन्द्रनाथ नाम के एक नाथपंथी का आगमन हुआ था। इसी वजह से यह एक धार्मिक केंद्र भी है। 17 वी शताब्दी में अंग्रेज़ो ने मराठाओ को हरा कर इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था। ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठाओ के बीच बहुत लम्बा युद्ध चला जिसमे अंत में आकर अंग्रेज़ो ने मराठो पर विजय प्राप्त की और इस किले पर कब्ज़ा कर लिया।

क्या है मलंगगढ़ से जुड़ा हुआ विवाद?

इस जगह से जुड़ा हुआ विवाद बहुत पुराना है। हिन्दू धर्म को मानने वाले गोरखपंथ से जुड़े हुए लोगो का कहना है की यहाँ पर नाथ पंथ के संत मच्छिन्द्रनाथ की समाधी है। यहाँ हर साल पालकी निकलती है और यहाँ हर रोज भोग लगाया जाता है। वही दूसरे पक्ष का कहना है की यह 13 वीं सदी में यमन से आये सूफी संत सूफी फ़क़ीर हाज़िर अब्दुल रहमान शाह मलंग की मज़ार है। दोनों पक्षों ने एक एक हिस्से पर अपना कब्ज़ा कर रखा है और इसी को लेकर वक़्त वक़्त में लोगो में तकरार होती रहती है।

ट्रेक कितना लम्बा है और कितना कठिन है?

अगर हम मलंगगढ़ किले पर पहुंचने तक की बात करे तो यहाँ तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 5 से 6 किलोमीटर का ट्रेक करना होगा। बेस गांव मलंगवाड़ी से शुरू हुए इस ट्रेक में आपको शुरुआत में कुछ सीढ़ियों द्वारा जाना होता है, जो की हाजी मलंग दरगाह तक पहुंच देती हैं।

इस ट्रेक का शुरू का पार्ट तो आसान है जिसे कोई भी कर सकता है लेकिन इस ट्रेक का जो सबसे डिफिकल्ट पार्ट है वो है किले के ऊपर हिस्से का जिसमे आपको दो पाइप पर चलकर या लटक कर किले के ऊपर दूसरी ओर जाना होता है। यह इस ट्रेक का सबसे डिफिकल्ट पार्ट है इसे आप किसी विशेष गाइड और ट्रेकिंग विशेषज्ञों की देखरेख में ही करे।

यहाँ रुकने और खाने की व्यवस्था है?

यदि आप इस ट्रेक को करते हैं और यहाँ ट्रेक के दौरान लेट हो जाते हैं तो आप यहाँ रुक भी सकते हैं। यहाँ रहने के लिए रूम उपलब्ध हैं, जिन्हे आप किराये पर ले सकते हैं। ट्रेक के शुरुआत से लेकर दरगाह तक आपको रुकने की और खाने पीने की दुकाने मिल जाएगी। दरगाह के पास में आपको कुछ दुकाने फूलो और चाय की देखने को मिलेंगी जहाँ आप नास्ता कर सकते हैं।

मलंगगढ़ किले तक का ट्रेक कैसा है?

मलंगगढ़ किले के ट्रेक को आप तीन भागो में बाट सकते हैं। पहला और दूसरा भाग ज्यादा कठिन नहीं है, लेकिन सीढ़ियों द्वारा एक दम से खड़ी चढ़ाई थोड़ी कठनाई को बड़ा देती है। ट्रेक करते वक़्त आप यहाँ के बंदरो से भी सावधान रहें और ट्रेक के दौरान कोई भी खाने पीने का सामान अपने हाथ में लेकर न चले।

ट्रेक का सबसे डिफिकल्ट भाग तीसरा है जो की दो पाइप से होकर किले के दूसरे भाग की ओर ले जाता है, जिसे आप सिर्फ रस्सी और ट्रेकिंग उपकरण की सहायता से ही कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं की कैसे हैं इस ट्रेक के ये तीन भाग :-

पहला भाग- 01 (बेस गांव मलंगवाड़ी से हाजी मलंग दरगाह तक)

ट्रेक का पहला भाग बेस गांव मलंगवाड़ी से शुरू होता है। मलंगगढ़ से दरगाह तक की दूरी 3.5 से 4 किलोमीटर की है, जिसे पूरा करने में आपको लगभग 3 घंटे लग सकते हैं। यह शुरू का ट्रेक काफी आसान है, जिसमे आप लगभग 1500 सीढ़ियों द्वारा ट्रेक को करते हैं।

इस रास्ते में आपको पानी की काफी आवश्यकता होती है जहाँ कुछ स्रोत मौजूद हैं और इस रास्ते में आपको काफी दुकाने भी मिल जाएँगी। रास्ते में दो छोटी दरगाह भी पड़ती हैं। जिन्हे पहली सलामी और दूसरी सलामी कहा जाता है। ट्रेक के इस भाग में आपको बहुत से श्रद्धालु मिल जायेंगे।

दूसरा भाग- 02 (दरगाह से सोन माची तक)

ट्रेक का असल पार्ट तो यहाँ से शुरू होता है। दरगाह के बाद से ट्रेक में आपको कुछ घर दिख जायेंगे। इसके बाद आपको चट्टानों पर चढ़ कर सोन माची के शिखर तक का सफर तय करना होता है।

ये ट्रेक अगर कोई पहली बार कर रहा है तो उसके लिए कठिन हो सकता है लेकिन जिसने काफी ट्रेक किये हों उनके लिए ट्रेक का यह भाग आसान होता है। इसमें आप लोगो द्वारा चट्टानों को काटकर बनायीं गयी सीढ़ियों द्वारा सोन माची तक का सफर तय करते हैं। जिसमे कही-कही पर ये सीढ़ियां बुरी तरह से टूट चुकी हैं। ट्रेक का ये भाग पहले भाग की तुलना में थोड़ा कठिन और तीसरे भाग की तुलना में आसान है।

तीसरा भाग- 03 (सोन माची से बैलेकिला तक)

ट्रेक का सबसे कठिन भाग यहाँ से शुरू होता है। इस भाग को तभी करे जब आपके पास ट्रेकिंग उपकरण और ट्रेकिंग विशेषज्ञ साथ हों बरना नहीं। अगर आपने आज से पहले कोई भी ट्रेक न किया हो उसके बाद अगर आप इस ट्रेक को करते हैं तो मैं आपको ट्रेक के इस भाग को करने की बिलकुल भी सलाह नहीं दूंगा। तब आपको ट्रेक के इस भाग को करने से बचना चाहिए। ट्रेक का ये भाग चट्टानों को काट कर बनायीं गयी सीढ़ियों और बहुत ही पतले रास्ते से होकर जाता है। रास्ते में एक बार में एक ही व्यक्ति चल सकता है बस इतनी ही जगह है यहाँ पर।

malanggarh fort

जब आप इस रास्ते को पार करके शिखर पर पहुंचते है तो आपको सामने की ओर एक कमरा नज़र आता है, जिसकी छत हट चुकी है। ऊपर आपको सात टैंक देखने को मिलते हैं जिसमे पानी भरा हुआ है। दूर से यह किसी हाथी की सूंढ़ की तरह मालूम होता है। शिखर से आपको दूर तक के सुन्दर पहाड़ देखने को मिलते हैं।

औप पढ़ें- केदारकांठा ट्रेक

मलंगगढ़ किले तक कैसे पहुंचे?

अगर आप इस ट्रेक को करना चाहते हैं तो आपको महाराष्ट्र पहुंचना होगा। आप यहाँ तक किन-किन साधन द्वारा पहुंच सकते हैं अब हम उसके बारे में जानेगे।

फ्लाइट द्वारा मलंगगढ़ किले तक कैसे पहुंचे?

यदि आप भारत के किसी और राज्य से आते हैं और आप यहाँ फ्लाइट द्वारा आना चाहते हैं तो कल्याण से सबसे निकट एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो की मुंबई में स्थित है। यहाँ से कल्याण तक की दूरी 45 किलोमीटर तक की है। जिसे आप ट्रेन और टैक्सी या बस द्वारा पूरा कर सकते हैं। कल्याण से ऑटो या बस द्वारा आप मलंगगढ़ किले तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा मलंगगढ़ किले तक कैसे पहुंचे?

अगर आप ट्रेन द्वारा यहाँ आना चाहते हैं। तो ये सबसे अच्छा उपाए है यहाँ तक पहुंचने का। अगर आप देश की किसी और भाग से आते हैं तो आप सबसे पहले मुंबई पहुंचे वहां से कल्याण तक की दूरी को तय करे।

कल्याण रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेने आपको दादर, ठाणे और राज्ये के अलग हिस्से से नियमित तौर पर मिल जाएंगी। जिसके द्वारा आप आसानी से कल्याण तक पहुंचे सकते हैं। यदि यहाँ पर पहुंचने में आपको कोई भी दिक्कत होती है तो आप गूगल मैप की सहायता भी ले सकते हैं।

बस द्वारा मलंगगढ़ किले तक कैसे पहुंचे?

अगर आप बस द्वारा यहाँ आना चाहते हैं तो आप बस द्वारा भी यहाँ पहुंच सकते हैं। लेकिन आपको इसके आधे सफर को या तो ट्रेन द्वारा या फिर फ्लाइट द्वारा तय करना होगा। आप मुंबई तक की दूरी को ट्रेन या फ्लाइट द्वारा तय कर सकते हैं।

उसके बाद आप यहाँ से बस द्वारा कल्याण पहुंचे सकते हैं। कल्याण से बस नियमित अंतराल के बाद चलती हैं। तो यहाँ पहुंचकर बस के बारे में पूरी इनफार्मेशन ले ले। बस से कल्याण तक पहुंचने में आपको 1 से 2 घंटे लगेंगे। उसके बाद आप बेस गांव से किले तक का ट्रेक शुरू कर सकते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • आप जब इस ट्रेक को करे तो ट्रेक करते वक़्त यहाँ के बंदरो से सावधान रहे। आप अपने सभी सामान को बैग में ही रखे और हाथ में कोई भी खाने पीने की चीज न लेकर चले।
  • यह एक ऐसा ट्रेक है जिसके शुरुआत में आपको खाने पीने से लेकर रुकने की व्यवस्था भी मिल जाएगी।
  • अगर आप ऊपरी भाग के ट्रेक को करना चाहते हैं तो आप ट्रेकिंग विशेषज्ञों द्वारा ही इस भाग को करे और सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम रखे।
  • ट्रेक के ऊपरी भाग में कोई भी पानी का स्रोत नहीं है तो ऊपर के भाग के लिए अपने साथ पानी जरूर रखे।

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