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Best Places to Visit in Guptkashi ( गुप्तकाशी तथा इसके आसपास स्थित घूमने की बहुत ही अच्छी जगहें )

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भारत का उत्तराखंड देवभूमि के नाम से जाना जाता है क्यूंकि उत्तराखंड को महादेव का घर माना जाता है। यहाँ महादेव पंच केदार (केदारनाथ, रुद्रनाथ, तुंगनाथ, मध्येश्वरनाथ, कल्पेश्वरनाथ) रूप में विराजमान हैं। उसके साथ उत्तराखंड ही वह जगह है जहाँ महादेव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। उत्तराखंड में स्थित यह जगह त्रियुगीनारायण नाम से प्रसिद्ध है।

देवभूमि उत्तराखंड का प्रत्येक शहर किसी न किसी धार्मिक कहानी या मंदिर के वजह से प्रसिद्ध है। आज हम इस ब्लॉग में उत्तराखंड के गुप्तकाशी शहर में स्थित तथा इसके आस-पास की कुछ बहुत ही अच्छी जगहों के बारे में जानेगे, इसलिए हमने इस ब्लॉग का नाम “Best Places to Visit in Guptkashi” रखा है।

गुप्तकाशी कहाँ है? (Where is Guptkashi)

गुप्तकाशी शहर भारत के उत्तराखंड राज्ये के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक खूहसूरत शहर है। इस शहर का महत्व इसलिए भी बहुत है क्यूंकि शहर का सीधा सम्बन्ध महादेव से है और यह केदारनाथ धाम जाने वाले राष्टीय राजमार्ग पर स्थित है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवो से छिपने के लिए महादेव इसी शहर से अंतर्ध्यान हुए थे, इसलिए इस शहर का नाम गुप्तकाशी पड़ा।

तो आईये जानते हैं यहाँ की कुछ सबसे अच्छी जगहों के बारे में, जिससे आप जब भी गुप्तकाशी जाए तो आप इन जगहों पर घूम सके।

गुप्तकाशी में घूमने की बहुत ही अच्छी जगहें (Best Places to Visit In Guptkashi)

आप जब भी उत्तराखंड में पंच केदार मंदिर में दर्शन करने के लिए जायेंगे तो आप गुप्तकाशी शहर से होकर ही जायेंगे तो आपको गुप्तकाशी शहर में कुछ समय रूककर गुप्तकाशी में भी घूमना चाहिए। इस शहर का नाम महादेव की वजह से ही पड़ा है। गुप्तकाशी में महादेव के कुछ बहुत ही प्राचीन मंदिर हैं और इसके आस-पास भी बहुत सुन्दर मंदिर हैं जहाँ आपको जाना चाहिए। तो आईये जानते हैं इन सभी जगहों और मंदिरो के बारे में…..

विश्वनाथ मंदिर (Vishwanath Mandir)

गुप्तकाशी में मुख्य मार्किट से लगभग 1 किलोमीटर ऊपर की ओर स्थित है विश्वनाथ मंदिर, जिसे “काशी विश्वनाथ मंदिर” भी कहते हैं। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की यह महाभारत काल से भी पुराना है और इसी मंदिर में भगवान शिव ने माता पार्वती के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था।

इस मंदिर से समबन्धित सभी जानकारी को हम पहले भी बता चुके हैं तो उससे भी जरूर पढ़े। गुप्तकाशी में स्थित यह एक बहुत ही अच्छा और शांत मंदिर है समय बिताने के लिए और घूमने के लिए।

अर्धनारेश्वरी मंदिर (Ardh Nareshwari Temple)

विश्वनाथ मंदिर के पास में ही अर्धनारेश्वरी मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर में आप शिव और शक्ति दोनों रूपों के दर्शन कर सकते हैं। गुप्तकाशी में स्थित यह मंदिर भी बहुत ही प्राचीन माना जाता है। इस मंदिर के बारे में कहते हैं की भगवान शिव और माता पार्वती जी एक साथ इस मंदिर में विराजमान हैं। तो यह भी एक अच्छा स्थान है गुप्तकाशी में घूमने के लिए।

Best Places to Visit in Guptkashi

इस मंदिर के ठीक सामने के मणिकर्णिका कुंड है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है की इस कुंड में जल धाराएं गिरती हैं। इन जल धाराओं में एक धारा गंगा जी की है और एक धारा यमुना जी की है।

कालीमठ मंदिर (Kalimath Temple)

कालीमठ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में और गुप्तकाशी के पास ही स्थित एक बहुत ही प्राचीन और सुन्दर मंदिर है। यह मंदिर विश्वनाथ मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर तक आप आसानी से गाड़ी द्वारा पहुंच सकते हैं।

कालीमठ मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय नवरात्रों का है। वैसे आप साल में कभी भी इस मंदिर में पूजा करने और माता के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। यह मंदिर साल भर खुला रहता है।

ओम्कारेश्वर मंदिर उखीमठ (Omkareshwar Temple Ukhimath)

आप गुप्तकाशी से उखीमठ के लिए भी जा सकते हैं। जो केदारनाथ जाने वाले मार्ग के बीच में ही पड़ता है। यदि आप यहाँ ठंडो के समय में आ रहे हो तो आपको उखीमठ जरूर आना चाहिए।

उखीमठ का ओम्कारेश्वर मंदिर बाबा केदार की शीतकालीन गद्दी है। जब नवंबर के बाद केदारनाथ के कपाट 6 महीनो के लिए बंद कर दिए जाते हैं तब बाबा केदार की पंच मुखी मूर्ति को इसी मंदिर में 6 महीनो के लिए विराजमान कर दिया जाता है इसलिए ठंडो में लोग बाबा केदार के दर्शन आप इस मंदिर में कर सकते हैं।

त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple)

आप गुप्तकाशी से त्रियुगनारायण गांव भी जा सकते हैं। गुप्तकाशी से त्रियुगीनारायण गांव की दूरी 38 किलोमीटर है, जिसे आप गाड़ी द्वारा आसानी से पूरा कर सकते हैं। यदि आप अपनी पत्नी के साथ यहाँ आये हैं तो आपको त्रियुगीनारायण गांव में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर जरूर जाना चाहिए।

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की यही वह मंदिर है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। विवाह के सभी काम विष्णु जी ने माता पार्वती के भाई के रूप में किये थे और पंडित जी कार्य ब्रह्मा जी ने किया था। शिव जी के विवाह होने के कारण ही यह मंदिर और यह गांव विवाह करने के लिए बहुत अधिक प्रसिद्ध है।

नारायण कोटि मंदिर (Narayan Koti Mandir)

गुप्तकाशी से 3 किलोमीटर दूर ही स्थित है “नारायण कोटि मंदिर”। यह बहुत से मंदिरो का समूह है, जिनके बारे में कहा जाता है की इन मंदिरो को 9 वीं शताब्दी में बनाया गया था और तब इनकी संख्या 360 हुआ करती थी।

वक़्त के साथ-साथ और देख रेख न होने के कारण और समय समय पर आने वाली आपदाओं के कारण इन मंदिरो की संख्या सिर्फ 40 बची है। यह मंदिर पुरानी शैली में बने हुए हैं और इनपर की गयी नक्काशी इन्हे और खूबसूरत बनाती है। तो आपको इस मंदिर में भी जरूर जाना चाहिए।

गौरीकुंड (Gauri Kund)

यदि आप ठंडो के समय में गुप्तकाशी आये हुए हैं, तो आप केदारनाथ मंदिर तक तो नहीं जा सकते हैं, लेकिन आप गौरी कुंड तक अवश्य जा सकते हैं। यह जगह माता गौरी यानि माता पार्वती को समर्पित है। कहते हैं की इसी जगह पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी, इसलिए इस जगह का भी बहुत महत्व है। यहाँ एक कुंड भी बना हुआ, जिसमे हमेशा गर्म पानी रहता है।

केदारनाथ मंदिर के लिए पैदल ट्रेक यहीं से शुरू होता है। यहाँ गौरी कुंड में स्नान करके और माता गौरी का आशीर्वाद लेकर ही श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर का ट्रेक शुरू करते हैं।

यदि आप गुप्तकाशी आते हो तो गुप्तकाशी में घूमने के साथ-साथ आपको इन आस-पास की जगहों पर भी जरूर जाना चाहिए।


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